जालोर (राजस्थान) । संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की ओर से शुक्रवार को जारी सिविल सेवा परीक्षा के परिणाम में जालोर की डिम्पल चौहान ने 131वीं रैंक हासिल कर सफलता प्राप्त की है । उनकी इस उपलब्धि से जालोर जिले में खुशी का माहौल है और परिजनों सहित शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई दी है ।
डिम्पल चौहान के पिता डॉ. रमेश चौहान चिकित्सा विभाग से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं । वे मूल रूप से बीकानेर के निवासी हैं । लेकिन सरकारी सेवा के दौरान वर्ष 1990 से जालोर में रह रहे हैं ।
डॉ. चौहान जालोर में उप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी पद से सेवानिवृत्त हुए हैं । लंबे समय से जालोर में निवास करने के कारण डिम्पल की प्रारंभिक शिक्षा भी यहीं से शुरू हुई ।
IIT गुवाहाटी से ली डिग्री : डॉ. चौहान ने बताया कि डिम्पल ने आठवीं कक्षा तक की पढ़ाई जालोर में ही की । इसके बाद दसवीं कक्षा की पढ़ाई उदयपुर और बारहवीं की पढ़ाई कोटा से पूरी की । शुरू से ही मेधावी छात्रा रही डिम्पल ने आगे की पढ़ाई के लिए गुवाहाटी से IIT की डिग्री प्राप्त की । पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में जाने का लक्ष्य तय कर लिया था और उसी दिशा में लगातार तैयारी करती रहीं ।
पांचवें प्रयास में बनीं IAS : डॉ. रमेश चौहान ने बताया कि घर में हमेशा पढ़ाई और शिक्षा का माहौल रहा । जिसका प्रभाव डिम्पल पर भी पड़ा । इसी वातावरण से प्रेरित होकर उन्होंने IAS बनने का सपना देखा और उसे पूरा करने के लिए निरंतर मेहनत करती रहीं । हालांकि शुरुआती प्रयासों में उन्हें अपेक्षित रैंक नहीं मिल पाई,लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और लगातार प्रयास जारी रखे ।
पिछली बार आई थी 800वीं रैंक : डिंपल के पिता ने बताया कि पिछले प्रयास में डिम्पल को करीब 800वीं रैंक मिली थी, जिसके आधार पर वर्तमान में वे दिल्ली में केंद्रीय ट्रेड एंड टैक्स विभाग में सहायक आयुक्त के पद पर कार्यरत हैं । इसके बावजूद उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और इस बार अपने पांचवें प्रयास में 131वीं रैंक प्राप्त कर भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित होने में सफलता हासिल की ।
डॉ. चौहान ने कहा कि बेटियों की शिक्षा और उनके सपनों को पूरा करने के लिए परिवार का सहयोग बहुत जरूरी होता है उन्होंने कहा कि जब बेटियां प्रशासनिक सेवाओं जैसी जिम्मेदार और प्रभावशाली भूमिकाओं में आगे आएंगी तो समाज को और अधिक मजबूती मिलेगी । डिम्पल की इस सफलता को जिले के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है ।
