नई दिल्ली । अयोध्या- कई दिनों से शांत रहे राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा राजफाश हुआ है । चोरी उजागर होने के तीन दिन बाद मीडिया में आकर ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपतराय व सदस्य डॉ. अनिल मिश्र पर आरोप लगाने वाले पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने प्रकरण की जांच कर रही एसआईटी को अपने आरोपों से संबंधित साक्ष्य सौंपे,साथ ही कुछ नए आरोप भी लगाए ।
महिपाल ने कहा कि ट्रस्ट गठन के समय राम मंदिर निर्माण का इस्टीमेट 800 करोड़ रुपये का था । लेकिन कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए 2200 करोड़ रुपये खर्च किए गए ।
26 जुलाई को पूर्व गठित एसआईटी के अध्यक्ष लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत ने ट्रस्ट के राम कचहरी कार्यालय के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह को ई-मेल भेज आरोपों से संबंधित साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया था । कहा था कि यदि आवश्यकता हुई तो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से उनका बयान भी दर्ज कर लिया जाएगा । महिपाल ने गत नौ जून को कई सनसनीखेज आरोप लगाए थे । उनका आरोप था कि वर्ष 2021 में ही उन्होंने चढ़ावा चोरी पकड़ ली थी ।
नोटों की अधिक गड्डियां ले जाकर करते थे चोरी: राम शंकर यादव टिन्नू की शह पर बैंककर्मी रत्नेश चतुर्वेदी व गगन दीप नोटों की अधिक गड्डियां ले जाकर चोरी करते थे ।
यह बात चंपतराय को बताने पर उन्होंने शांत रहने को कहा और अगले दिन उन्हें डॉ. अनिल मिश्र ने हटा कर सुभाष श्रीवास्तव की ड्यूटी लगा दी । यही सुभाष अब पुलिस की गिरफ्त में हैं ।
महिपाल ने कहा है कि ट्रस्ट ने निर्माण कार्यों की देखरेख के लिए इलेक्ट्रिक इंजीनियर जगदीश आफले को प्रोजेक्ट इंजीनियर बना दिया था । उन्हें सिविल इंजीनियरिंग का अनुभव नहीं था । इसी कारण मंदिर निर्माण वास्तु के अनुरूप नहीं हुआ । निशुल्क मिल रहे बंशी पहाड़पुर के पत्थरों को न लेकर ट्रस्ट ने अधोमानक गुणवत्ता के पत्थर खरीदे । चंपतराय ने महांत शशिकांत दास को उपकृत करने के लिए उनके राम कचेहरी मंदिर में ट्रस्ट का कार्यालय खोला,जबकि जगन्नाथ मंदिर,लवकुश मंदिर व रंगमहल मंदिर में निशुल्क स्थान मिल रहा था । कई ऐसे अनधिकृत लोगों से विवादास्पद संपत्तियां खरीदीं, जिन पर ट्रस्ट को कब्जा नहीं मिला और न्यायालय में वाद दायर होने पर धन खर्च हुआ ।
