फतेहपुर । जिलाधिकारी रविन्द्र सिंह ने बताया कि मुख्य सचिव उप्र शासन के शासनादेश संख्या 2024 लखनऊ कृषि अनुभाग-2 ,05 सितम्बर 2024 के द्वारा एवं प्रमुख सचिव उ०प्र० शासन 17 फरवरी 2026 के द्वारा निर्देश निर्गत किये गये है कि फसलों के अवशेष जलाये जाने से उत्पन्न हो रहे प्रदूषण की रोकथाम के दृष्टिगत जनपद स्तर पर एक सेल का गठन करते हुये प्रत्येक दिन अनुश्रवण किये जाने एवं प्रत्येक गाँव के ग्राम प्रधान एवं क्षेत्रीय लेखपाल को किसी भी दशा में अपने से सम्बन्धित क्षेत्र में पराली /कृषि अपशिष्ट न जलाये जाने हेतु कार्यवाही सुनिश्चित करने साथ ही कृषकों के मध्य फसल अवशेष जलाने से मिट्टी, जलवायु एवं मानव स्वास्थ्य को होने वाली हानि से अवगत कराने एवं जिन कृषकों द्वारा फसल अवशेष जलाये जाने की घटना सामने आती है । उनके विरुद्ध दण्डात्मक कार्यवाही किये जाने के निर्देश दिये गये हैं ।
उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय नई दिल्ली द्वारा पारित आदेश 03 अप्रैल 2025 के पारिपालन में सी०ए०क्यू०एम० द्वारा जारी डायरेक्शन 90 के अन्तर्गत पराली जलाये जाने की घटनाओं को शून्य करने का लक्ष्य रखा गया है । जिसकी निगरानी उच्चतम न्यायालय द्वारा की जा रही है ।
सर्वोच्च न्यायालय एवं राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) द्वारा निर्गत आदेशों के अनुपालन में फसल अवशेष जलाये जाने से हो रहे वायु प्रदूषण की रोकथाम के साथ ही वायु गुणवत्ता प्रबन्धन आयोग ने भी पराली को जलाने की घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रभावी कार्यवाही किये जाने के निर्देश दिये गये हैं ।
जनपद फतेहपुर में वर्तमान में रबी फसलों (गेंहूँ, सरसों, चना, मटर आदि) तथा गन्ना की कटाई के पश्चात् पराली/फसल अवशेष जलाये जाने की सम्भावना के दृष्टिगत फसलों के अवशेष जलाये जाने से उत्पन्न हो रहे प्रदूषण की रोकथाम हेतु निम्नानुसार कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश निम्नवत प्रसारित किये जाते हैं :-
1- फसल अवशेष प्रबन्धन – गेंहूँ की कटाई के समय कम्बाइन हार्वेस्टर मशीन में सुपर स्ट्रा मैनेजमेन्ट सिस्टम (सुपर एस०एम०एस०) लगाये जायें अथवा कटाई के बाद फसल अवशेष प्रबन्धन के यंत्रों जैसे- हैपी सीडर/स्मार्ट सीडर, सुपर सीडर, सरफेस सीडर, पैड़ी स्ट्रा चोपर/बेडर/मल्चर, रोटरी स्लैसर / अब मास्टर, हाइड्रोलिक रिवर्सिबल मोल्ड बोर्ड प्लाऊ, जीरो टिल सीड कम फर्टीलाइजर ड्रिल का प्रयोग खेत में अवश्य कराया जाए अथवा क्राप रीपर, रीपर कम बाइन्डर,रेक एवं बेलर का प्रयोग कर फसल अवशेष को अन्य कार्यों जैसे-पशु चारा, कम्पोस्ट खाद बनाने, बायो कोल, पैलेट्स यूनिट, बायो फ्यूल एवं सी०बी०जी० आदि में उपयोग किये जाने हेतु प्रेरित किया जाये ।
खेतों में फसल अवशेष को शीघ्रता से सड़ाने हेतु पानी भरकर यूरिया का छिड़काव भी किया जा सकता है । जिससे शीघ्रता से फसल अवशेष खाद के रूप में परिवर्तित हो जाता है ।
बायो डिकम्पोजर का उपयोग पराली/फसल अवशेष को कम्पोस्ट बना कर कृषक के खेत में इन-सीटू प्रबन्धन कर तथा सामुदायिक तौर पर प्रोत्साहित किया जा सकता है । इसके लिए किसान के खेत में अथवा सामुदायिक स्थलों पर उचित क्षमता वाले कम्पोस्ट खाद के गड्ढे का खुदान कराया जाना उचित होगा ।
फसल अवशेष को संग्रहीत कर प्रदेश में स्थापित सी०बी०जी० प्लान्ट्स एवं अन्य जैव ऊर्जा उत्पादन इकाईयों को उपलब्ध कराकर कृषक अतिरिक्त आय भी प्राप्त कर सकते हैं । इसके लिए एग्रीग्रेटर के रूप में कस्टम हायरिंग सेन्टर की स्थापना हेतु कृषक उत्पादक संगठनों (एफ०पी०ओ०) को आवश्यक कृषि यन्त्रों पर 80 प्रतिशत तक की छूट प्रमोशन ऑफ एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन फार इन-सीटू मैनेजमेन्ट ऑफ क्राप रेजिड्यू योजनान्तर्गत देय है ।
2- आई०ई०सी० के कार्य – कृषकों को जागरूक बनाने के लिए इन्फार्मेशन एजूकेशन कम्यूनिकेशन आई०ई०सी०) एक्टिविटी कृषि विभाग द्वारा तत्काल प्रारम्भ कर दी जाये एवं कृषकों से सम्बन्धित प्रत्येक विभाग की कार्यवाही का समावेश इनमे किया जाये ।
प्रत्येक उत्तरदायी विभाग जन सामान्य को जागरूक करने हेतु अपनी गतिविधियों को इस प्रकार नियोजित करें कि रबी फसल की कटाई से पूर्व कृषकों में फसल अवशेष प्रबन्धन से लाभ का व्यापक प्रचार-प्रसार हो जाये । जिससे कि कृषक फसल अवशेष प्रबन्धन के उपायों को सफलता पूर्वक अपनाकर उचित फसल अवशेष प्रबन्धन कर सकें ।
फसल अवशेष प्रबन्धन के इस अभियान में स्थानीय जन प्रतिनिधि यथा ग्राम पंचायत सदस्य,ग्राम प्रधान का सक्रिय सहयोग लिया जाये तथा विकासखण्ड स्तर पर ग्राम प्रधानों का सम्मेलन करके उन्हें प्रेरित किया जाये कि वे अपनी ग्राम पंचायत में इस अभियान का नेतृत्व करते हुये इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करायें तथा कृषकों को फसल अवशेष न जलाये जाने हेतु प्रेरित करें ।
प्रत्येक ग्राम पंचायत में ग्राम पंचायत की बैठकें करके ग्राम पंचायत एवं ग्राम विकास अधिकारी अपनी ग्राम पंचायत में ग्रामीणों व कृषकों को फसल अवशेष प्रबन्धन के लिए जागरूक एवं प्रेरित करें । इसके लिए गाँव में रैली एवं प्रभात फेरी निकाली जाये । ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत अधिकारी और ग्राम विकास अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि ग्राम पंचायत में कूड़ा एवं फसल अवशेष जलाने की घटना न हों ।
जनपद स्तर पर कृषि विभाग द्वारा आयोजित किये जाने वाली गोष्ठी को प्रारम्भ कर दिया जाय तथा फसल अवशेष जलाने से मिट्टी, जलवायु व मानव स्वास्थ्य को होने वाले हानियों से अवगत कराया जाय ।
प्रत्येक प्राथमिक,माध्यमिक एवं उच्चतर विद्यालयों में छात्रों की सभायें आयोजित करके “फसल अवशेष प्रबन्धन की आवश्यकता” विषय पर परिचर्चा एवं व्याख्यान दिया जाय तथा छात्रों में इस विषय पर निबन्ध एवं चित्रकला इत्यादि प्रतियोगिता आयोजित कराकर छात्रों को प्रेरित किया जाय । इसके लिए जनपद के बेसिक शिक्षा अधिकारी एवं जिला विद्यालय निरीक्षक उत्तरदायी होंगे और माह अप्रैल में इन कार्यक्रमों का आयोजन कर लिया जाये ।
कृत कार्यवाही का अभिलेखीय संकलन उप कृषि निदेशक द्वारा करके मुख्यालय को उपलब्ध कराया जाये ।
इन सीटू योजनान्तर्गत आयोजित न्याय पंचायत स्तर एवं जनपद स्तर के गोष्ठियों के माध्यम से कृषकों को फसल अवशेष जलाने से होने वाली क्षति के सम्बन्ध में अवगत कराया जाये और कृषकों को पराली जलाने की घटना की रोकथाम एवं इससे हो रहे नुकसान के सम्बन्ध में अवगत कराया जाय ।
कृषकों को यह भी अवगत कराया जाये कि मा० राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेश के अनुसार फसल अवशेष जलाया जाना एक दण्डनीय अपराध है । राजस्व विभाग के आदेश 13 नवंबर 2017 द्वारा पर्यावरण को हो रहे क्षतिपूर्ति की वसूली के निर्देश हैं । इसमें 02 एकड़ से कम क्षेत्र के लिए रू0 2500/-, 02 से 05 एकड़ क्षेत्र के लिए रू० 5000/- और 05 एकड़ से अधिक क्षेत्र के लिए रू० 15000/- तक पर्यावरण कम्पन्सेशन वसूली के निर्देश हैं ।
पराली जलाने की घटना पाये जाने पर सम्बन्धित को दण्डित करने के सम्बन्ध में राजस्व विभाग के शासनादेश 13 नवंबर 2017 द्वारा राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम की धारा-24 के अन्तर्गत क्षतिपूर्ति की वसूली एवं धारा-26 के अन्तर्गत उल्लंघन की पुनरावृति होने पर सम्बन्धित के विरुद्ध अर्थदण्ड इत्यादि की कार्यवाही की जायेगी । इससे भी कृषकों को अवगत कराया जाय ।
3- प्रवर्तन की कार्यवाही : राजस्व ग्राम के लेखपाल की जिम्मेदारी होगी कि अपने क्षेत्र में फसल अवशेष जलनें की घटनायें बिल्कुल न होने दें अन्यथा उनके विरुद्ध भी विभागीय कार्यवाही की जायेगी । प्रत्येक राजस्व ग्राम के लिए राजकीय कर्मचारी एवं ग्राम प्रधान को ग्राम पंचायत/न्याय पंचायत स्तर पर नोडल अधिकारी निम्नवत नामित किये जा रहे हैं । जो अपनी-अपनी अधिकारिता में फसल अवशेष जलाने से हो रही हानि की जानकारी कृषकों को देंगे तथा प्रयास करेंगे कि उनके क्षेत्र में फसल अवशेष जलाने की कोई घटना घटित न हो । ग्राम पंचायत स्तर पर निम्नवत समिति का गठन किया जाता है ।
