अरबी-पर्शियन विभाग की प्रमुख डॉक्टर ताहिरा अब्बासी ने प्रस्ताव का विरोध किया है ।
मध्यप्रदेश । राजधानी भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने का फैसला लिया गया है । इसके मुताबिक़ अब विश्वविद्यालय का नया नाम ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ होगा । यह फैसला विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की बैठक में बुधवार को लिया गया । राजा भोज की ऐतिहासिक विरासत के साथ ही साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में उनके योगदान का हवाला देते हुए विश्वविद्यालय का नाम उनके नाम पर करने का प्रस्ताव रखा गया ।
बैठक में मौजूद कार्य परिषद सदस्य और विश्वविद्यालय की अरबी-पर्शियन विभाग की प्रमुख डॉक्टर ताहिरा अब्बासी ने प्रस्ताव काविरोध किया । उन्होंने कहा कि बरकतउल्ला भोपाली ख़ुद एक स्वतंत्रता सेनानी थे । इसलिए इस विश्वविद्यालय का नाम नहीं बदला जाना चाहिए ।
इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने नाम बदलने से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है । हालांकि अंतिम रूप से नाम में बदलाव लागू होने के लिए राज्य सरकार और अन्य वैधानिक प्रक्रियाओं की औपचारिकताएं पूरी की जानी बाक़ी हैं ।
मौलाना मोहम्मद बरकतउल्ला भोपाली (1854–1927) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख क्रांतिकारियों में से एक थे ।
यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉक्टर एबी सिंह ने पत्रकारों को बताया कि नाम बदलने के संबंध में दो फैसला लिया गया है उसका प्रस्ताव जल्द ही शासन की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा ।
बरकतउल्ला विश्वविद्यालय की स्थापना साल 1970 में भोपाल विश्वविद्यालय के रूप में हुई थी । बाद में साल 1988 में इसका नाम स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी चिंतक मौलाना बरकतउल्ला भोपाली के सम्मान में बदलकर बरकतउल्ला विश्वविद्यालय रखा गया था । मौलाना मोहम्मद बरकतउल्ला भोपाली (1854–1927) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख क्रांतिकारियों में से एक थे और भारत की पहली निर्वासित सरकार के प्रधानमंत्री थे । उनका जन्म भोपाल में हुआ था । वे विदेशों में रहकर भारत की आज़ादी के लिए सक्रिय अभियान चलाते रहे वे गदर आंदोलन से जुड़े प्रमुख नेताओं में शामिल थे उन्होंने जापान,अमेरिका,जर्मनी और अफ़ग़ानिस्तान जैसे देशों में रहकर ब्रिटिश साम्राज्य के ख़िलाफ़ जनमत तैयार किया उन्हें भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के अंतरराष्ट्रीय चेहरों में गिना जाता है ।
