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ईरान । देश के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद खातमी ने अमेरिका के साथ हुए ‘एमयूओ’ का बचाव करते हुए कहा है कि “इस अवसर को हाथ से न जाने दें ।” मोहम्मद खातमी की गिनती ईरान के सुधारवादी नेताओं में होती है ।
फ़ारसी के मुताबिक़ उन्होंने कहा “युद्ध के बाद, देश और लोगों के लिए एक शानदार मौक़ा मिला है ।”
खातमी ने सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद और ईरान के सैन्य कमांडरों की ओर से ‘समझौते’ (एमओयू) पर पहुंचने के फ़ैसले की भी प्रशंसा की और कहा “राष्ट्रपति के साहस और त्याग की सराहना की जानी चाहिए ।”
उन्होंने कहा “हालांकि अमेरिका पर भरोसा नहीं किया जा सकता । फिर भी इन मुद्दों को समझदारी और कूटनीति से निपटाना होगा । मुझे उम्मीद है कि इस बार यह अवसर हाथ से नहीं निकलेगा; क्योंकि दुर्भाग्य से यह कई बार चूक चुका है और अगर यह चूक गया तो ख़तरे और भी गंभीर हो जाएंगे ।” उन्होंने कहा कि किसी भी समझौते में, रियायतें दी भी जाती हैं और रियायतें ली भी जाती हैं हाल के हफ़्तों में ईरान में रूढ़िवादियों ने राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान की सरकार के रुख़ और बातचीत पर जोर देने की आलोचना की है ।
मोहम्मद खातमी ने यह भी कहा कि एक “सम्मानजनक शांति” हासिल की जानी चाहिए और उन लोगों के लिए रहने की जगह तैयार की जानी चाहिए जो गंभीर मुश्किलों में जी रहे हैं ख़ासकर रोज़ी-रोटी और बेहतर भविष्य के मामले में ।”
