कानपुर : होली के दूसरे दिन भैया दूज के त्यौहार में बहनों ने भाई के माथे पर तिलक लगाकर भाई की लंबी उम्र के लिए कामना की जाती है और उसे नर्क की यातनाओं से मुक्ति दिलाने के लिए उसका तिलक किया जाता है । उसी प्रकार होली के बाद भाई का तिलक करके होली की भाई दूज मनाई जाती है । जिससे उसे सभी प्रकार के संकटों से बचाया जा सके । शास्त्रों के अनुसार होली के अगले दिन भाई को तिलक करने से उसे सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति मिलती है ।
भाई दूज के खास दिन पर बहन अपने भाई के माथे पर तिलक करके उनका मुंह मीठा किया । इस मौके पर भाई भी अपनी प्यारी बहन को तोहफा उनके साथ और विश्वास को हमेशा बनाए रखने का वादा किया ।
शास्त्रों के अनुसार कहा जाता है कि भगवान सूर्य देव की पत्नी का नाम छाया था । उनकी कोख से यमराज तथा यमुना का जन्म हुआ । यमुना अपने भाई यमराज से बड़ा स्नेह करती थी । वह उससे बराबर निवेदन करती कि वह उसके घर आकर भोजन करें । लेकिन यमराज अपने काम में व्यस्त रहने के कारण यमुना की बात को टाल देते थे । कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमुना ने अपने भाई यमराज को भोजन करने के लिए आमंत्रित किया । बहन के घर आते समय यमराज ने नर्क में निवास करने वाले जीवों को मुक्त कर दिया । भाई को देखते ही यमुना ने हर्ष विभोर होकर भाई का स्वागत सत्कार किया तथा भोजन करवाया । इससे प्रसन्न होकर यमराज ने बहन से वर मांगने को कहा । बहन ने भाई से कहा आप प्रतिवर्ष इस दिन मेरे यहां भोजन करने आया करेंगे तथा इस दिन जो बहन अपने भाई का आदर सत्कार करे तथा मस्तक पर टीका करके भोजन खिलाए उसे आप का भय ना रहे मुझे ऐसा वरदान चाहिए । यमराज तथास्तु कहकर यमुना को अमूल्य वस्त्र आभूषण देकर यमपुरी को चले गए । उसी दिन से भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक यह भैया दूज का पर्व धूमधाम से मनाया जाने लगा ।
